मुद्दतों बाद इक नज़र देखा
चाहते तो न थे मगर देखा
खुद ब खुद पास आ गई मन्ज़िल
जब मेरा जज़्बाए-सफ़र देखा
खुद की कमियाँ नज़र नहीं आईं
आईना यूँ तो उम्र भर देखा
Saturday, April 5, 2008
Sunday, March 23, 2008
Saturday, March 1, 2008
क्या मिला
क्या किताबों में मिला, और क्या रिसालों में
सुख मिला भी तो मिला है महज़ ख़यालों में
मेरी परछाईं तक ने मुझसे साफ साफ कहा-
“मैं तेरा साथ तो दूंगी, मगर उजालों में “
तुझे ही शौक था, सबको जबाब देने का
उलझ के रह गई ना ज़िन्दगी सवालों में
शहर मे दर्द अकेले का, गाँव मे सबका
यही है फ़र्क़, शहर वालों, गाँव वालों में
पवन दीक्षित
सुख मिला भी तो मिला है महज़ ख़यालों में
मेरी परछाईं तक ने मुझसे साफ साफ कहा-
“मैं तेरा साथ तो दूंगी, मगर उजालों में “
तुझे ही शौक था, सबको जबाब देने का
उलझ के रह गई ना ज़िन्दगी सवालों में
शहर मे दर्द अकेले का, गाँव मे सबका
यही है फ़र्क़, शहर वालों, गाँव वालों में
पवन दीक्षित
Tuesday, February 26, 2008
रहने दे
मुझसा लगना रहने दे
कुछ तो अपना रहने दे
अपनी हसरत पूरी कर
मेरा सपना रहने दे
उकता गया ख़ुशी से मन
आज अनमना रहने दे
सच कहने की हिम्मत कर
यूँ दिल रखना रहने दे
सिर्फ़ भरम ही टूटेंगे
छोड़, परखना रहने दे
सच्चा होना काफ़ी है
गंगा जमना रहने दे
कहता है तू ख़ैर से है
ख़ुद को ठगना रहने दे
पवन दीक्षित
कुछ तो अपना रहने दे
अपनी हसरत पूरी कर
मेरा सपना रहने दे
उकता गया ख़ुशी से मन
आज अनमना रहने दे
सच कहने की हिम्मत कर
यूँ दिल रखना रहने दे
सिर्फ़ भरम ही टूटेंगे
छोड़, परखना रहने दे
सच्चा होना काफ़ी है
गंगा जमना रहने दे
कहता है तू ख़ैर से है
ख़ुद को ठगना रहने दे
पवन दीक्षित
Monday, February 25, 2008
अपने भी, बेगाने भी
अपने भी, बेगाने भी रिश्ते मगर निभाने भी
सिर्फ परेशाँ जाते हैं
मन्दिर भी, मैख़ाने भी
क्या ख़ूबी से बोले है
सच्चे लगैं बहाने भी
उनकी क्या मजबूरी थी
बात भी की, पहचाने भी
अबके ईदी नहीं मिली ”हामिद” को दो आने भी
पवन दीक्षित
सिर्फ परेशाँ जाते हैं
मन्दिर भी, मैख़ाने भी
क्या ख़ूबी से बोले है
सच्चे लगैं बहाने भी
उनकी क्या मजबूरी थी
बात भी की, पहचाने भी
अबके ईदी नहीं मिली ”हामिद” को दो आने भी
पवन दीक्षित
Thursday, February 21, 2008
kaash....
काश, मेरी जगह जो तू होता
तो मेरे ग़म से रू ब रू होता
मैं तेरी आरज़ू न करता तो
जाने कितनो की आरज़ू होता
पवन दीक्षित
तो मेरे ग़म से रू ब रू होता
मैं तेरी आरज़ू न करता तो
जाने कितनो की आरज़ू होता
पवन दीक्षित
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